वन अनुसंधान संस्थान (FRI), देहरादून में 10 जुलाई 2026 को “वन पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण और सतत प्रबंधन” पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान की निदेशक श्रीमती ऋचा मिश्रा,IFS द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में भारतीय सेना लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज गुरुंग, मेजर पी.सी. मिश्रा और 45 अन्य सैन्य कर्मियों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया।
इस अवसर पर, ट्रेनिंग का उद्घाटन करते हुए वन अनुसंधान संस्थान की निदेशक श्रीमती ऋचा मिश्रा, ने रक्षा गतिविधियों के साथ पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि जहाँ भारतीय सेना राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, वहीं जलवायु को नियंत्रित करके, जैव विविधता का संरक्षण करके और आजीविका में सहायता करके पारिस्थितिक स्थिरता के लिए जंगल भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य रक्षा तैयारियों और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच एक संतुलित दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है।
यह प्रशिक्षण सेना के कर्मियों को पारिस्थितिक चिंताओं के प्रति संवेदनशील बनाने पर केंद्रित था, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ सैन्य गतिविधियाँ संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र के साथ जुड़ी हुई हैं। मुख्य विषयों में फायरिंग रेंज में पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं की पहचान, वन्यजीवों के प्रजनन से जुड़ी चिंताएँ, प्रदूषण की रोकथाम और खराब हो चुकी ज़मीन (लैंडस्केप) को बहाल करना शामिल है।
वन अनुसंधान संस्थान के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक श्री एन. बाला ने खराब हो चुकी वन भूमि को बहाल करने पर व्याख्यान दिया। ज़ूलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया, कोलकाता के वैज्ञानिक डॉ. ललित कुमार शर्मा ने सैन्य फायरिंग रेंज में प्रमुख जीवों के व्यवहार, प्रजनन संबंधी चिंताओं और आवश्यक सावधानियों पर विस्तृत व्याख्यान दिया । विशेषज्ञों ने जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं, इको-रेस्टोरेशन (पारिस्थितिक बहाली) और प्रदूषण प्रबंधन पर भी सत्र आयोजित किए, जिसमें मिट्टी, पानी और हवा पर फायरिंग गतिविधियों के प्रभाव को कम करने पर जोर दिया गया।
इस कार्यक्रम में वन अनुसंधान संस्थान के ग्रुप कोऑर्डिनेटर (रिसर्च) डॉ. डी.पी. खाली, प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर डॉ. वी.पी. पंवार, पब्लिसिटी और लाइज़निंग ऑफिसर डॉ. तारा चंद, साथ ही विभिन्न विभागों के प्रमुख, वैज्ञानिक और वन पारिस्थितिकी और जलवायु परिवर्तन विभाग के तकनीकी पेशेवर शामिल हुए। बैठक का समापन धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।






