आईसीएफआरई-वन अनुसंधान संस्थान में राष्ट्रीय आउटरीच कार्यशाला के दूसरे दिन वनों की आग से निपटने के नवाचार एवं सोशल मीडिया की भूमिकापर चर्चा

राष्ट्रीय आउटरीच कार्यशाला के दूसरे दिन का आयोजन आईसीएफआरई-वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई), देहरादून में “वनाग्नि अनुसंधान एवं ज्ञान प्रबंधन” (ए.आई.सी.आर.पी.-14) विषय पर केंद्रित रहा। सत्र की अध्यक्षता आईसीएफआरई के उप-महानिदेशक (अनुसंधान) डॉ. राजेश शर्मा ने की।

सत्र की शुरुआत श्रीमती ऋचा मिश्रा, आईएफएस, प्रमुख, सिल्वीकल्चर एवं वन प्रबंधन प्रभाग द्वारा की गई, जिन्होंने समेकित वनाग्नि प्रबंधन रणनीतियों, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली तथा पर्वतीय क्षेत्रों में विशेष रूप से चीड़ वन पारिस्थितिकियों में आग के प्रभाव और पारिस्थितिकीय सीमा मान की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

इसके पश्चात प्रो. इंदरदीप सिंह, आईआईटी रुड़की द्वारा अग्निशमन उपकरणों जैसे ‘झप्पा’ (आग बुझाने वाली झाड़ू), फायर रेक्स, और फायर सिकल के नवाचारों का प्रदर्शन किया गया। वहीं, डॉ. एलिप्स श्रीवास्तव (डीआरडीओ-सीएफईईएस, नई दिल्ली) ने एससीबीए किट, सुरक्षात्मक वस्त्रों, एवं अलर्ट प्रणालियों सहित नवीनतम सुरक्षा उपकरणों की जानकारी दी।

विचार-विमर्श के दौरान पूर्वोत्तर एवं उत्तर-पश्चिम हिमालयी क्षेत्रों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता की चुनौती पर विशेष चर्चा हुई, जिसे मेघालय और हिमाचल प्रदेश के आईएफएस अधिकारियों द्वारा उजागर किया गया।

सत्र के दूसरे भाग में डॉ. उज्जवल चुघ द्वारा सोशल मीडिया की भूमिका पर केंद्रित “आग से प्रसिद्धि तक”प्रस्तुति दी गई। उन्होंने बताया कि कैसे सोशल मीडिया आग की रोकथाम में जागरूकता, त्वरित सूचना और सामुदायिक भागीदारी का प्रभावी माध्यम बन रहा है। इस दौरान “Ploggers of India”अभियान के श्री रिपु दमन बेवली और ओडिशा के “सबुजस्मृति अभियान”जैसे सफल उदाहरण प्रस्तुत किए गए।

कार्यक्रम का समापन डॉ. राजेश शर्मा द्वारा भविष्य की कार्य योजनाओं के प्रस्तुतीकरण और निदेशक, आईसीएफआरई-एफआरआई, डॉ. रेनू सिंह के समापन उद्बोधन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने निरंतर अनुसंधान और हितधारकों की भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया। अंत में, डॉ. वी.के. वर्श्नेय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। इस कार्यशाला में देशभर से वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, वन अधिकारियों, किसानों, और तकनीकी विशेषज्ञों की भौतिक व आभासी माध्यम से सक्रिय भागीदारी रही, जिसका संचालन डॉ. विपिन प्रकाश, डॉ. के.पी. सिंह, डॉ. मनीष सिंह भंडारी एवं डॉ. अमित वर्मा के नेतृत्व में किया गया।

    August 7, 2025
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